एक कहानी जो मैंने अपने  पिछले 2 फेसबुक एकाउंट्स पर  अपने पाठकों के लिए लिखी और प्रकाशित करी थी। दोनों बार एक अलग अंदाज से और हर बार उस कहानी के प्रकाशित होने के उपरांत मेरे दोनों अकाउंट्स न जाने अपनी बाकी की तमाम रचनाओ के साथ फेसबुक की किस अंधेरी खाई या वीराने में लुप्त हो गए पता ही नही चला।

शायद इसका एक महत्वपूर्ण कारण यह रहा होगा कि मै सितम्बर 2016 में पहली बार फेसबुक या किसी भी प्रकार की मोबाइल तकनीकी से जुड़ा था और अपने अकाउंट्स के देख रेख से पूणता अनजान था।

मै विक्रांत राजलीवाल पिछले 3 दिनों से बुखार और अपने एक कान के सूजन एव दर्द से बेहद पीड़ित हु और कल रात मेने उसी पीड़ा में एक बार फिर से अपनी उस कहानी को अपनी शोशल मीडिया के पाठकों के लिए एक नए अंदाज से लिखने का प्रयत्न आरम्भ किया है।

उम्मीद है आज रात को अपनी और आपकी उस कहानी को अपनी तमाम ब्लॉग साइट्स पर प्रकाशित कर दूंगा

धन्यवाद।

आपका अपना रचनाकार विक्रांत राजलीवाल।

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