Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Dec 25, 2017
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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क्रिसमस का त्यौहार।

FB_IMG_1514210535654.jpgक्रिसमस का त्यौहार है आया, खुशिया अपने संग है लाया।
नई रौशनी, नया उत्साह, जीवन की रग रग में है समाया।।

क्या हिन्दू है क्या मुसलमान, क्या है सिख, ईसाई।
गले मिले आपस मे सब, सब ने ही खुशिया मनाई।।

यही हिन्द की पहचान है यारो, हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई।
त्योहार है सब के अपने अपने, खुशिया मगर हर दिल मे एक समान समाई।।

भूल कर बेर भावना सब अपनी, गले मिले एक दूजे से और सबने ही मिल जुल कर के मिठाई है खाई।

गुंजा एक स्वर, हर दिशा से, बड़ी है बड़े दिन की बात, थाम कर हाथ एक दूजे का है सबने साथ साथ खुशिया मनाई।।

रात चाँदनी, झिलमिलाते सितारे, देख रहे है वो भी झुक झुक कर, एक धर्म भाईचारे का, सुंदर इस धरती के ऊपर।

महक गुलाबी देखो यह कैसी, नजारा है स्वर्ग से भी सुंदर,
हर धर्म हो गया एक, कैसा यह करिश्मा इस धरती के ऊपर।।

दुआ निकलती है इस दिल से, हर रोज़ ही हो त्यौहार यह क्रिसमस।
रोज़ ही मनाए मिल जुल कर हम, भाईचारे से त्यौहार यह क्रिसमस।।

आज क्रिसमस का पावन त्योहार है तो अस्वस्थ होने के बाबजूद इस पावन त्योहार के विषय मे लिखने से खुद को रोक नही पाया।

रचनाकार एव लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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