👉मेरी प्रथम प्रकाशित पुस्तक जिसका नाम एहसास है और पुस्तक एहसास का केंद्र बिंदु हमारे समाजिक समाज एव हम सब के मानव ह्रदय से समाप्त होती समाजिक एव मानवता की  भावनाओ पर अपनी कविताओं द्वारा एक प्रहार की एक कोशिश मात्र है प्रकाशित समय जनवरी 2016 दिल्ली विशव पुस्तक मेला।
(संजोग प्रकाशन शहादरा द्वारा प्रकाशित प्रथम पुस्तक एहसास)

उम्मीद है आपको पसंद आए।

आगामी पुस्तके दर्द भरी नज्म-शायरी रूपी  अधूरी महोबतकी अधूरी दस्ताने एव एक अत्यंत दर्द भरा उपन्यास।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
(स्वतन्त्र लेखन)

👉👉मेरे द्वारा लिखित गयी मेरी आगामी किताब नज़्म-शायरी के रूप में वह अनकही-अनसुनी अधूरी महोबत के दस्ताने है जो आप सब का दिल आपकी धड़कती धड़कनो से चिर कर एक गहरा जख़्म छोड़ जाएगी।

👉👉👉एक बात और मै आप सब महानुभवों से कहना चाहूंगा कि  में सोशल मीडिया पर अभी नया हु एव 2016  मई से लेखर अब तक कि आप मेरे द्वारा रचित एव लिखी गयी 260+रचनाए जो कि नज़्म-शायरी, कविताओ, लेख और विचारों के रूप मे है आप सब जिन्हें मेरे ब्लॉग सीट्स पर पढ़ और आनन्द ले सकते है।

👉👉👉👉अपनी इन ब्लॉग साइट्स पर आने का एक महत्वपूर्ण कारण था कि आप सब महानुभवों से मेरा एक छोटा सा परिचय उपलब्ध हो सके एव आपको मेरी कला का एक छोटा सा नमूना पेश किया जा सके।

👉  इसके अलावा आप सब मेरे प्रकाशित एव आगामी ब्लॉग रचनाएँ मेरे  youtube चैनल पर मेरी आवाज के साथ मुझे देख और सुन भी पाएगें।

मेरे चैनल का पता है।(रचनाकार विक्रांत राजलीवाल।)

https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A

👉  👍My first Hindi novel being written by me is  unique in its kind. From now on to our own conclusion, I mean to achieve our conclusion.

The focus of which is the central point of focus, on the response of social, friendship, love-affair. And full of entertainment-filled drama
Which will force everyone to laugh, cry and be drunk.
Thank you.
Vikrant Rajliwal.

मेरे ब्लोग्स साइट्स का पता है।

1. https://vikrantrajliwal.wordpress.com

2. http://vikrantrajliwal1985.tumblr.com/

3. http://poetryshayristorywithvikrantrajliwal.blogspot.com

4. https://plus.google.com

5. http://m.facebook.com/writer-Rajliwal-Vikrant-

यह सब पढ़ने और समझने के लिए आप सब का अपने ह्रदय से आभारी आपका अपना विक्रांत राजलीवाल।

धन्यवाद

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल।

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