दर्द झलकता है अहसासों का तेरे, तेरे हर एक लव्ज़ के साथ
जख्म आते है दिल के नज़र तेरे, तेरी उन सुनी नज़रो के साथ

बतलाता है सितम, धड़कनो का रुक जाना तेरे,
खाया है धोखा तूने, किसी चाहने वाले के हाथ

जी रहा है रुसवाई ए ज़िन्दगी, कत्ल है मासूम अहसासों का जो तेरे
वाकिफ़ नही जो ज़माना, ये तन्हाई, ये हाल ए दीवाना सा जो तेरे

न होना कत्ल, ए ज़िन्दगी, बाकी है अभी,अरमान ए ज़िन्दगी, ज़िन्दगी के तेरे
बदलेगा मौसम खुश्क एक रोज , साथ है दुआए चाहने वालो की अब भी साथ तेरे. ..

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
#Writer & Poet Vikrant Rajliwal-

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