ज़ी रहा हैं तनहा दीवाना,याद सनम को करते हुए।
मर रहा हैं बेबसी से,नाम ऐ सनम लेते हुए।।

याद हैं उल्फत के अब भी दिन वो रंगीन।
रहते थे पहेलु में सनम के, होती थी हर धड़कन वो संगीन।।

लिख दिया जो, हर धड़कन पे दिल के नाम ए सनम,
यु ही उन-धड़कनो को ,सुनाया हर किसी को नही जाता।

तोड़ के गुलाब ले ले जो खुशबू ,मसले-पंखुड़िया गुलाब की
दर्द हैं एक दीवाने का जो दिल-कश, यु ही उसे हर समय
बतलाया नही जाता।।

मासूम चेहरा ,फरेबी अदाएं, दिल तोड़ देती हैं।
होती हैं ज़माने में जब रुसवाईयाँ, धड़कने रोक देती हैं।।

लगते हैं इलज़ाम अक्सर दीवाने पे रंगीन।
टुटा हैं दिल उसका मग़र, हर धड़कन उसकी संगीन।।

लेता हैं नाम ए सनम दीवाना,सनम कही दीखता नही।
रहता है तन्हा तन्हाई में अक्सर,
दर्द-दिल की उसके, मरहम कोई नही।।

दास्तान सच्ची महोबत की,अक्सर अधूरी रहती हैं।
हर दास्तान, अंजाम-महोबत,जान दीवाने की लेती हैं।।

होते हैं खुश-नसीब आशिक वो दीवाने
बगल में जीनके महक-सनम होती हैं…👤

रचनाकार विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

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