दिखा किसी गुलिस्ता में
जब भी कोई गुलाब

छूने को पंखुड़ी,लेने को खुशबू
दिल ए दीवाना मचल गया

काटो पे रख के दिल अपना
दीवाना फिर से सम्भल गया

सुने है, किसे वफ़ा ए ऐतबार के
खाये धोखे जब अपने यार से
छली ये दिल हो गया।

भूल गया, नाम ए महोबत
दर्द ए दिल, जो तड़प गया

जी रहा तन्हा-तन्हाई में
देख आईना रुस्वाई का

सह गया, धड़कनो से अपने
सितम ए यार सब हस्ते हुए

जल रही जो रूह उसकी
जीते जी ही वो मर गया

कहते हैं महोबत, आशिक़ दीवाने
सदियों से जमाने मे जिसे

जहनुम हैं वो दरिया एक आग का
जल जाता हैं दिल ए दीवाना
वफ़ा का उस-में कोई काम नही

देखता हैं हुस्न परवाना फिर भी
तैयार है वो जल जाने को

आलम है मदहोशी का
दिल धड़कनो में उनके
रहम नही

चलते हैं बेपरवा निग़ाहों से, बाण-जहरीले,
आशिक वो निगाहे, बेदर्द है संग-दिल सनम हमारे

देख के मदहोशी से सूरत ए यार
मुस्कुराते हैं दर्द-बेदर्दी सनम हमारे

हो जाता हैं ज़ख़्मी ये दिल
तड़पती हैं रूह ज़िंदा ज़िस्म में फिर हमारे

दे देते हैं ज़ख्म दिल पे, स्यार वो निगाहे
महोबत-सनम के, आशिक वो ज़ुल्म-दीवाने

करता हैं महोबत, तड़प ए महोबत
देख चेहरा, उनका वो रूमानी

दे-देगा, दगा, हुस्न ए यार,जब
दिखा के बेहुदा कोई चाल अपनी

फाड़ के आ जायेगा केसः(मज़नू)
कब्र से बाहर फिर अपनी।

नाम लेला का ज़ुबा से अपने
दीवाना अब पुकारेगा

दिखा के आइना-वफ़ा
दीवाना हर ज़ुल्मो-सितम को
ललकारेगा।

मुफलिसी का है दामन मेरा
टाट का पेमन्द लिए

ढूंढता हैं मुकाम कोई
तन्हा ज़िन्दगी के लिए…. जारी अगले क्रम में

👤रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

*My second unpublished book is based on nazam-shayri, painful heartbroken unsuccessful love issues.

View on WordPress &tumblr*

Advertisements

Leave a Reply