तन्हाई।

खो गया है चाँद मेरा, चांदनी इस रात में कहि।
छिल गया है जख़्म मेरा, टूटा जो दिल का तार कहि।।

चाहत चीखती है मेरी, झिलमिल हर लम्हा नज़रो में कहि।
दर्द पुकारता है मेरा, ख़ामोश धड़कने, नाम-महोबत का वही।।

भड़क जाती है चिंगारी, आग दबी सासो में, अब भी जो कहि।
आईने टूटे है अक्स ए यार, दगा-महोबत, बेवफ़ाई उनमे कहि।।

चल रही है किश्ती, नाम ए वफ़ा, ऐतबार ए यार, डूबता मुसाफ़िर, जो तन्हा कही।
ढूंढ रही है साहिल, उफ़ान ए समुन्दर, उफनते जज़्बात, कत्ल जूझते अहसासों से कहि।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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