Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Jan 15, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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एक दर्द।

नही आती है नींद दीवाने को क्यों आज-कल।

भूल गया है रंगीन हर ख़्वाब वो क्यों आज-कल।।

हो गया है खुद से ही बेगाना वो क्यों आज-कल।

रह गया है तन्हा भरे बाजार में वो क्यों आज-कल।।

लेता है रुसवा बेदर्द रातो में नाम वो किसका आज-कल।

तड़पता है देख कर हाल ए दीवाना वो अपना आज-कल।।

ढूंढता है निसान ए महोबत, दर्द ए जुदाई, काली श्याह रातो में वो किसके आज-कल।

पूछता है सवाल ए महोबत, मांगता है जवाब ए हक़ीक़त वो आईने से टूटे, किसके आज-कल।।

क्यों है इंतज़ार अब भी उसे, दर्द यह अवमस्या की रात, ख्वाहिश है एक आखरी दीदार ए पूनम का वो एक चाँद।

क्यों है टूटती हर उम्मीद,अब भी उसे एक आरज़ू आखरी, यक़ीन है एक दर्द महोबत, अहसास ए धड़कन, उसकी हर एक बात।।

 

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वरा लिखित।

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