Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Jan 27, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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🌷एक विशेष सूचना एव आपसी सहयोग।

प्रिय मित्रों,

🌻 सुप्रभात।

आज आप सब मित्रो एव गुरुजनों के साथ अपनी एक भावना और अपने कुछ एक विचार सांझा कर रहा है उम्मीद करता हु आप मेरी इस भावना को समझ सके और अपने विचार एव राय मुझ से और अन्य सदस्यों के साथ सांझा कर इस अनमोल रिश्ते को और भी मजबूती प्रदान करें।

आज के विषय चर्चा की शुरुआत कुछ सामान्य वर्तालाव से प्रारम्भ की जाए तो अधिक उत्तम होगा।

✔जी हा, मेरे ह्रदय के बेहद समीप, मेरे दिलाज़िज़ मित्रो आपको अपने रचनाकार विक्रांत राजलीवाल का यूट्यूब चैनल और उनकी ब्लॉग रचनाओ की वीडियो केसी लगी और अपनी अपने वाली वीडियो में मैं क्या क्या बदलाव कर सकता हु?

आप निसंकोच अपने विचार मुझ से सांझा करे।

📻एक अति महत्वर्पूण सन्देश यह है कि अब आप अपनी रचनाएँ अपने इस फेसबुक ब्लॉग पेज पर सांझा कर सकते है (सन्देशक अथवा विजिट क्षेत्र) (http://m.facebook.com/writer-Rajliwal-Vikrant-)20180126_012415.jpg

🌹और हर रविवार को कम से कम तीन*3* रचनाओ को उनके लेखक या रचयिता के नाम के साथ मैं सबके सम्मुख आपके इस बलाग पर पर प्रकाशित करूँगा।

🐳आपकी रचना किसी भी शैली में हो सकती है चाहे वो लिखित हो अथवा वीडियो सन्देश के जरिए हु इससे कोई फर्क नही पड़ेगा। बशर्ते हर रचनाकार अपनी हर रचना के नीचे अपना नाम अंकित करे। इसके अलावा आप तारिक या आपकी रचना अगर किसी वेबसाइट पर है तो view on वेबसाइट का नाम अंकित करें। ऐसा करने से आप अपनी जगह मजबूत कर पाएंगे।

🐝अब हम सब सदस्यों के समीप एक सुनहरा अवसर है एक दूसरे को और भी नज़दीक से समझने का, एक दूसरे से भविष्य में भी जुड़े रहने का, तो आइए और इस एक नेक कार्य मे अपना अपना योगदान दीजिए।

🎤एक बार पुनः आप सब का सहयोग चाहूंगा अपने जीवन मे एक नया प्रयोग एक नई शुरुआत जो मैंने अपने चैनल के माध्यम से करी है उसके सुधार और विस्तार के विषय में हर पल, हर क्षण आपका सहयोग चाहूंगा।

क्योंकि…

🎥जरूरत है हर सास को एक नई सास की, हर धड़कन को एक नए अहसास की,

हम मुसाफ़िर है एक ही किस्ती के मेरे मांझी, ये दरिया नही आग कोई, जिसमे के दुब जाएंगे हम या जल जाएंगे हम।

करना है सफ़र साथ साथ, सफर ये जिंदगानी है।
आ जाओ साथ हमारे, बहुत तन्हा ये जिन्दानी है।।

शुक्रिया।

आपका अपना रचनाकार विक्रांत राजलीवाल।

🖋रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
(उनकी कलम से)

सम्पर्क सूत्र

पता: हरित विहार बुराड़ी दिल्ली।

मोबाइल न: 91+8130675543

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