Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Jan 28, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

no comments

🕊👉नया ज़माना।

बढ़ा कर हाथ, झुक जाना पीछे को
चलन हैं आज-कल, ये नए जमाने का

मुस्कुरा कर चरित्र-उछालना यारो का
दौर हैं आज कल,ये नये ज़माने का

जता कर यारी, दिखा के अपना-पन
असूल हैं देना जख्म बगल से उनका

भरी हैं रग-रग में मकारी जिनकी
शान हैं रंग बदलना,चलन ये नये ज़माने का…👤

✍रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।(शेयर करे)

एक वर्ष पूर्व की एक रचना।

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: