नमस्कार,

मैं रचनाकार विक्रांत राजलीवाल आप सब चाहने वालो को सूचित करना चाहता हु कि जल्द ही मेरी प्रथम प्रकाशित पुस्तक एहसास जिसको कि हर किसी पढ़ने वाले पाठक ने बेहद सरहाया और पसन्द किया, से आप सब की फरमाइश पर अपनी एक कविता एक एहसास जिसका शीर्षक है अजन्मा भ्रुण। जल्द ही आपके अपने YouTube channel Rachnakar Vikrant Rajliwal पर shoot कर के upload कर दूँगा। उम्मीद करता हु आपको पसंद आए।

यह केवल एक कविता ही नही है मित्रो यह एक एहसास हैं एक विरोध है उन समाजिक परम्पराओ पर जो आज भी हमारे समाज मे कहि न कही अपनी विषैली जड़ें मजबूत किए हुए है। यह आवाज है उन मासूमो की जिन्हें जन्म से पहले ही मौत की नींद सुला दिया गया वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वह एक लड़की थी या उनका लिंग स्त्री लिंग था। उम्मीद करता हु आप मेरे एक दर्द को समझ सके और इस प्रकार के कुविचारों और जघन्य अपराध के विरुद्ध अपने अपने तरीके से आपका विरोध कर उन मासूमो को एक श्रधांजलि और आने वाली पीढ़ियो को इस प्रकार के कुविचारों से मुक्ति प्रदान कर उन्हें शशक्त करे।

🙏बन कर अश्क़ नज़रो से गिर गयी जो बूंदे मेरे एहसास की,

अनमोल है वो दर्द, बिखर गया जो चीखती खामोशियो के साथ।

धन्यवाद।

अपना रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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