Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Mar 16, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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एक दर्द।

नही रहा कुछ भी कहने को ए साथी पास में अब जो मेरे।
नही बच पाए अल्फ़ाज़ अहसासों में ए साथी कोई पास में अब जो मेरे।।

ख़्वाहिश हर चाह मेरी, अब भी है लहूलुहान सी कहि ए साथी पास में अब जो मेरे।
सासे ये धड़कने है इल्जाम कोई, तड़प हर सांस से दर्द कोई ए साथी पास में अब जो मेरे।।

स्वतन्त्र लेखक विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।
(FB_IMG_1521083065858.jpg16/03/2018 at 22:07 pm)

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