Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Mar 17, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

no comments

अहसास ए पथर।

आज कल हम पथरो में रहते है, उजड़ा जो गुलिस्तां हमारा तो अब हम पथरो में रहते है।

करते है मुलाकाते पथरो से अक्सर, खो गया जो जलसा हमारा तो अब हम मुलाकाते पथरो से करते है।।

उम्मीद है शायद ये पथर कभी तो धरकेंगे, अहसास ए महोबत के अहसासों से शायद वह भी कभी तो तड़पेंगे।

दिल जो अब पथर हो गए, अहसास न जाने कहा खो गए, ये ख़ामोशीया है सितम उनका, हर सितम से अपने कभी तो ये पथर पिंघलेंगे।।

खड़ा है अब भी राह ए उम्मीदी से दीवाना, तलाश ए दरार दिख जाएगी कोई, वॉर ए महोबत से कर देगा चूर चूर हर पथर को ये दीवाना।

हर दिल है ये जो पथर, निशां ए बेबसी से जो जख्मी, जख्म ए दिल हर अहसासों पर 20180308_100844.jpgमरहम अपने लगा जाएगा जल्द ही कोई ये दीवाना।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

17/03/2018 at 7:34 am

 

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: