Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Mar 26, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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जिंदगी।

Shayari On My Photo_1522005718टूट सकते है ख्वाब, ए वक़्त मग़र टूट नही सकती उम्मीद ए जिंदगी, जिद है ये सांसे, जनून ए जिंदगी, जख्मी हर अहसासों से क़याम है अब भी जो यहाँ।

हार सकता है बेगाना, ए मुकदर मग़र हार नही सकती चाह ए जिंदगी, तड़प है ये धड़कने, इम्तेहां ए हौसले,तड़पती हर धड़कनों से कायम है अब भी जो यहाँ।।

स्वतन्त्र लेखक एव विचारक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

26/03/2018 at 01:02 am

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