Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Mar 27, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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प्रेम-मिलन।

सांझ ढ़लते ही सितारे चमचमाए, निल गगल में दूर कही चाँद भी इतराए।

बहती पवन के झोखे से अंग प्रत्यंग सुगन्ध से बगिया के कण कण महक जाए।।

आओ सखी ए मेरी साथी, साथ साथ गीत प्रेम का बगिया गुलाब में अब कोई हम गुनगुनाए।
खिल जाए मुरझाई क्यारियां प्रत्येक, सुर कोई साजे ऐसा कि जग जीवन भी मुस्का जाए।।

न कोई गिला, न कोई शिकवा, बेठ प्रेम से आओ न नजदीक सखी एक दूजे से प्रेम गीत अब कोई हम दोहराए।
प्यासा ये मन तपन प्रेम से, भाव व्यवहार ये ह्रदय प्रेम का, आलिंगन एक दूजे से आत्मा का अब अपने हम लगाए।।

खो जाए हर्ष ह्रदय ये संगीत से, चेतना जटिल ये जीवन की न अब हमे आने पाए।
अलिंगम ये प्रेम का प्रेम से, ह्रदय मेल आत्मा का आत्मा से अब हम एक हो जाए।।

स्वतन्त्र लेखक एव रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
27/03/2018 at 20:11 pmShayari On My Photo_1522161282

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