Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Mar 29, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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एक सन्देश।

सुप्रभात प्रिय पाठकों एव मित्रों।

आज सम्पूर्ण समाज साम्प्रदायिक तनाव की अग्नि से झुलस रहा है। आज हर तरफ सम्प्रदायिक राजनीति की अशुद्ध एव बेहद असंवेदनशील जड़े अपनी मजबूती को प्राप्त करते हुए देश के आम नागरिकों के अन्तःकरण में एक भय का भाव उतपन करने को उतारू है। इन सब के पीछे छुपा हुआ है आंतरिक स्वार्थ और यह केवल कुछ स्वार्थी व्यक्तिव के निम्न स्तर के कुछ अति असंवेदनशील असमाजिक तत्वों की देन है।

इस प्रकार के व्यक्ति कहि भी हो सकते है किसी भी संस्था या विभाग में भी हो सकते है। ऐसे निम्न स्तरीय व्यक्तिओ को शायद इस बात का तनिक भी एहसास नही है कि जब जब समाज सम्प्रदायिकता की अग्नि में झुलसा है तब तब उस असंवेदनशील अग्नि से न केवल कमजोर एव बेबसों के घर स्वाहा हुए है अपितु इस तीव्र अग्नि से इस उन के घर परिवार भी सुरक्षित नही भच पाए है। या बच पाएंगे!

आज हमारे समाज को आवश्यकता है आपसी भाईचारे की, एक चौतरफा समाजिक विकास की, जिससे हमारी आने वाली पीढियां खुद को सुरक्षित महसूस कर अपने सम्पूर्ण विकास को प्राप्त हो सके।

अंत में मैं केवल इतना ही कहना चाहूंगा कि…

घाव के बदले घाव दिया है तोड़ विशवास जख्म के बदले जख्म।
हर पीढ़ा मजबूर की हो रही नजरअंदाज,
फैली है असुरक्षा यहाँ, कर रहा राज हर ओर यहाँ दर्द और गम।।

स्वतन्त्र लेखक एव विचारक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित असामाजिकता के विरुद्ध एक दर्द-एक एहसास।

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