Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Mar 30, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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ख़ामोश अहसास।

Shayari On My Photo_1522394702ज़ख्म साए पर हर लम्हा जिंदगी के बेदर्दी से लगते गए।
तड़प सासो की हर लम्हा सितम अहसासों के बढ़ते गए।।

आरज़ू हर चाहत मेरी, साए में जिंदगी के मरती गयी।
हर लव्ज़ एक बग़ावत से ठोकर जिंदगी पर मेरी लगती गयी।।

सूर्य उगा और डूब गया, चाँद ये सितारे नसीब पर मेरे हँसते रहे।
साथ साए का भी न मिल पाया जब, कदम अपने आप ही मेरे उठते रहे।।

हर राह, हर मंज़िल, हर एक विशवास रूह का जिंदगी से,
वॉर मासूम अहसासों पर मेरे, हर लम्हा हम जो मरते रहे।

साथ शूलों का झुलसा दे ज़हर जिंदगी को जब, कदम बढ़ते शूलों पर जहर जिंदगी का खामोश लब पीने लगे।।

स्वतन्त्र लेखक विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

30/03/2018 at 13:03 pm

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