Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Mar 31, 2018
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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आत्मशांति।

Shayari On My Photo_1522497013इस संसार मे जो मनुष्य अपना चित्त स्थिर रख पाने में असमर्थ होता है।
वह अपने अशांत मन सहित अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में
निरन्तर भटकता ही रहता है।

इसलिए अपने चित्त की शांति के लिए खुद को खुद के व्यक्तित्व को सुधारते हुए, अपने व्यक्तिव में एक सकरात्मक बदलाव लाने की आज हम सब को अति आवश्यकता है।

अन्यथा…

कभी यहाँ तो कभी वहाँ भटकता ही रहा हु मै, कर के तबाह सुख-शांति, अविशवास सम्बन्धों में अपने ढूंढता ही रहा हु मै…

स्वतंत लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

31/03/2018 at 17:30pm

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