जय हनुमन्त अति बलदाई।
जन्म जन्म के दुख मिटाई।।

देख तुन्हें हर दुष्ट है भाग।
मिट जाता है हर जख्म ताजा।।

कौन है इस जग में तुमसा महान।
आते हो तुम ही दुखियो के काम।।

समीप ह्रदय है जवलित, तुम्हरा ही पवित्र उजाला।
अंधकार पल भर में मलिनता मन की दूर कर डाला।।

देख तुम्हे हर भक्त हरषाए।
तुम्हारे जैसा बनना हम चाहे।।

देह विशाल है किरपा जो तुम्हारी।
रोक दी है तुमने ही हर रात काली।।

श्री राम: चंद्र है साथ तुम्हारे।
तुम हो विचित्र बेहद निराले।।

भक्ति का है पाठ पढ़ाया।
अज्ञानी का ज्ञान जगाया।।

ब्रह्मचारी हु बाल्य काल से, शक्ति श्री राम की है तुम्हारी।
पवन-पुत्र हु पावन चरित्र, लीला पवित्र पावन है तुम्हारी।।

दे हुंकार हर पापी तुनमे ललकारा।
काम भी आगे तुम्हारे ठहर न पाया।

तुम हो मुझ को अत्यंत प्यारे।
समस्त जग से अत्यंत निराले।।

दुष्टो को पाठ नैकि का पढ़ाते हु।
मुक्ति उनसे इस जग को दिलाते ह।।

तुनमे दिखलाया उज्ज्वल उजाला सत्य का।
नाम से तुम्हारे मिटाया हर डर भुत-प्रेत का।।

रोगी भी निरोगी अब कहलाया।
लेकर नाम तुम्हारा अब हर्षाया।।

निर्बल को बल प्रदान करते हु।
भृमित का भृम हर लेते हु।।

अहंकारी का अहंकार खा जाते ह।
अहंकारी फिर भी नही कहलाते हु।।

तुममे ही है अति सयम एव बल।
कहा ठीक पाए फिर कपट एव छल।।

तुम्हारा है ओज-तेज़ निराला।
स्थापित है उसमें सत्य उजाला।।

तुमसा ये ओज-तेज़ कहा हम ला पाएँगे।
किरपा रहे जो हम पर तुम्हारी, कष्ट सब मिट जाएंगे।।

अज्ञानी को ज्ञान सिखाया।
अब वो भी ज्ञानी कहलाया।।

तुम ही हु गुरु ऐसे महान।
तुम से ही होते है सब काम।।

जय हो ब्रजरंग बलि।
दे दे अब मोक्ष गली।।

मिटा दु अज्ञान को खिल जाए व्यकुल मन की कली कली।
हर राह तुमसे ही है,जय हनुमन्ता, जय ब्रजरंगा, जय हु ब्रजरंग बलि।।

स्वतँत्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

31/03/2018 at 10:01 am20180331_100113

2 thoughts on “जय हनुमान।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s