Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Apr 17, 2018
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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जीवन।

Shayari On My Photo_1523968802.jpgएहसास सत्य का दर्पण है पवित्र अंतरात्मा का जो, पाप भाव से नही दूषित है भाव जो, न जीवित है न ही मृत्यु कोई जिसकी जो।

स्थिर भाव, स्थिर चरित्र, स्थिर है जिसकी ज्ञानिन्द्रिया, भाव वासना से है कोसो जो दूर, दिन प्रतिदिन प्रत्येक क्षण
वैराग्य समाधि से है परिपूर्ण जो ।।

न वो शिव है न कोई शक्ति, न है भाव मे जिसके कोई भक्ति, करता है महसूस फिर भी सत्य ह्रदय आत्मा से टूट गया विशवास ह्रदय आत्मा से अपने जो।

रास्ते ये जीवन के होते है अनन्त, हर ठोकर से बढ़ जाते है फासले, कभी खुद से तो कभी अपनो से, मंजिल है ज्ञान अनुभव से जीवन, सिखलाता है करीब से सबक हर एक जो।।

स्वतँत्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

17/04/2018 at 18:15 pm

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