Author, Writer, Poet, Drama and Story Writer Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

April 21, 2018
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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सफर-ज़िंदगी।

Image-7496.pngजिंदगी की भाग-दौड़ में मित्र साथी वो बच्चपन के दिन न जाने कहाँ खो गए।
दर्द तकलीफ़, एक घुटन सी जिंदगी, हर क्षण उदासी सी कोई, साथ हमारे हो गए।।

मुस्कान ये चेहरे की बनावट, जो मुखोटा सा कोई, छल है हर क्षण साथ सासो के जहर ये जो ज़िन्दगी।
सफर ये जलते शोले, राह शूल मंजिलो के मिटते निशान, ख़ामोश है राही हर लम्हा, ज़ख्म ये नासूर जो जिंदगी।।

न कोई दवा है न कोई दुआ, हर ज़ख्म बन गया जो एक बद्दुआ, तड़प सासों की तड़पती है अब धड़कने हर लम्हा।
जुल्म न सितम कोई अब बाकी रहा, बढ़ते हर कदमो से बढ़ते फासले, सफर अधूरा सा है अब भी जिंदगी हर लम्हा।।

स्वतन्त्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
21/04/2018 at 23:00pm

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