Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Apr 22, 2018
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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अधूरे अहसास!

आज शाम कुछ अलग सी तबियत है, गुम है धड़कने बन्द सीने की धड़कते दिल मे जो कहि।

रंग ए आसमां भी है कुछ बदला हुआ सा आज, नराजगी है यादें अधूरी सी चाहते, तड़प वो कायम है मजबूरियां जो कहि।।

अहसास नही है सांसे ये जिंदगी का कोई, बेचैनियां है ख़ामोश सी क्यों हर लम्हा जो कहि।

जान न जान सकेगा कोई, मजबूरियां ये सितम खुद ही खुद से है नाराजगिया, निसान रूह पर कायम जख्म जो कहि।।

स्वतँत्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
22/04/2018 at 20:52pmImage-6172

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