अलविदा मित्रों, अगर इस जीवन मे सांसे जीवित रह पाई तो आपसे फिर मुलाकात की इच्छा अवश्य रहेगी। अब अपने मित्र को आज्ञा दे!

शायद ईस्वर ने मेरी उच्च शक्ति ने मुझ को कलम के लिए और कलम को मेरे लिए नही बनाया है। अब यह बात मेरी समझ में आ गई है। मैं खुद से तो लड़ सकता हु मगर अपनी किस्मत से नही। इसलिए अलविदा मित्रो!

जब तक सांसे जीवित रहेगी कलम और कागज एक ख़्वाहिश रहेगी। मग़र ऐसा लगता है शायद यह ख़्वाहिश अब कभी भी अपने अंजाम तक न पहुच पाए।

आज से 2 वर्ष पूर्व मैंने सोचा था कि शायद इंटरनेट पर मेरी कलम का जादू चल पाएगा और मैं लगातार ताउम्र लिखता ही रहूंगा कभी कविता तो कभी नज़्म या कोई कहानी या लेख! परन्तु मेरी साधारण सी कलम इन 2 वर्षों में अपना जादू न दिख पाई! यह 2 वर्ष मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण थे। जितना इंटरनेट पर लिखा उतना ही कागजो पर भी लिखता गया जो अभी तक कहि भी प्रकाशित न हो पाया है न ही इंटरनेट पर और न ही किसी पुस्तक के रूप में! इसलिए अब मेरी भी समझ मे आ गया है कि अब वह समय आ गया है जब मुझ को आप सब से अपनी कलम से अलविदा कह देना चाहिए।

आज अहसास होता है कि अगर जीवन मे मेने पुनः पढ़ाई आरम्भ कर ने का 10वी से ba pass होने का, शादी के बाद यह कठोर निर्णय न लिया होता और इस निर्णय में कामयाब न हुआ होता तो,Shayari On My Photo_1524502558.jpg तो आज शायद में अपने जीवन के 10 वर्ष बचा पाता! आज 10 वर्षो के उपरांत भी में वही खड़ा हूँ! जीवन के 10 वर्ष बर्बाद कर देने के उपरांत।
इसलिए आज के बाद में कभी भी शायद अपनी कलम न उठा पाओ। हा एक लेखनी कार्य शायद जीवन का वह आखरी हो उसको पूर्ण करने की एक कोशिश जरूर करूँगा। अगर सब ठीक रहा तो पुनः आपसे जुड़ पाने की कुछ हिम्मत जुटा पाओ।

न अब कुछ कहने को है न अब और लिखने की हिम्मत ही शेष बच पाई है। जीवन मे हालात कभी एक से नही रहे, कभी खुद से तो कभी अपनो से हमेशा ही जूझना पड़ा है। हर एक सांस एक वरदान सी है। मृत्य तो अवश्य आई परन्तु उसका रूप कुछ अलग सा है। इसलिए अलविदा मित्रो। जीवन रहा तो पुनः मुलाकात अवश्य हो जाएगी। ये जीवन है हालात है कब बदल जाए कोई नही जानता, शायद बदलते हालातो में मेरी कलम मुझ को पुनः ढूंढ ले या शायद अब…

हो सकता है आप मेरी भावनाओ को समझ सके!

धन्यवाद।

एक साधारण व्यक्ति विक्रान्त राजलीवाल।

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