Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Apr 25, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

no comments

एक दर्द!

टूट कर बिखर सकता है बेगाना मग़र टूट कर भी टूट नही सकती जो एक चाह है वो ज़िन्दगी।
हार सकता है हर लम्हा ज़िन्दगी का जो रुका मग़र हार नही सकती जो चाहत है वो ये जिंदगी।।

घोट सकता है हर जिंदा ख्वाहिशो का ख़ुद हाथो अपने ये दम दीवाना मग़र मिट नही सकती जो यादे है वो अधूरी सी साथ जो जिंदगी।

कर सकता है उफ़नते हर जज्बातों का सामना अपने, उफ़नती हर धड़कनो से ये दीवाना मग़र नही बर्दाश जो दर्द अहसासों का है साथ हर लम्हा जो जिंदगी।।

स्वतन्त्र लेखक विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

25/04/2018 at 21:28pm

Shayari On My Photo_1524671519.jpg

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: