टूट कर बिखर सकता है बेगाना मग़र टूट कर भी टूट नही सकती जो एक चाह है वो ज़िन्दगी।
हार सकता है हर लम्हा ज़िन्दगी का जो रुका मग़र हार नही सकती जो चाहत है वो ये जिंदगी।।

घोट सकता है हर जिंदा ख्वाहिशो का ख़ुद हाथो अपने ये दम दीवाना मग़र मिट नही सकती जो यादे है वो अधूरी सी साथ जो जिंदगी।

कर सकता है उफ़नते हर जज्बातों का सामना अपने, उफ़नती हर धड़कनो से ये दीवाना मग़र नही बर्दाश जो दर्द अहसासों का है साथ हर लम्हा जो जिंदगी।।

स्वतन्त्र लेखक विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

25/04/2018 at 21:28pm

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