Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Apr 27, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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जीवन!

निर्दयी नही वह क्रूरता जिसने मेरा शोषण किया, शारीरिक यातना, मानसिकता प्रताड़ना से जिसने आत्मा को मेरी लहूलुहान किया।

निर्दयी थी वह भावना जिसने मुझ-को भृमित किया, सह गया हर अहसास प्रताड़ना को जो जीव निर्दयी है उसका हर भाव-उसकी हर भावना।।

स्वीकार कर न सका मनुष्य जो अस्तित्व को वास्तविक अपने, मरता गया डरता गया हर क्षण व्याकुलता से अपने हर क्षण ही वो तड़पता गया।

विशवास से उत्तपन हुआ अविशवास जो, घात था वो पल विशवास पर, झुलस गया जीवन अनमोल ये जिससे, ठोकरे खाता, तो कभी लड़खड़ाता हुआ जीवन अपना ये चलता गया।।

स्वतन्त्र लेखक विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

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