Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Apr 30, 2018
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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दिल से!

तेरे उस एक अधूरे अहसास से है जिंदा, आज भी रुकी सांसे मेरी।
तेरी उस एक हसीं मुस्कुराहट से है जख़्मी, आज भी धड़कती-धड़कने मेरी।।

एक तम्मना एक आरज़ू है बाकी अभी, एक मुलाकात एक दीदार तेरा, ख्वाहिश ये अभी बाकी है अभी।
न कोई होश है बाकी, जिंदगी का जिंदा ए दोस्त, सितम ये जुदाई तुझ से, इंतज़ार एक मौत का बाकी है अभी।।

स्वतन्त्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
30/04/2018 at 18:56 pm20180430_185339

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