Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

May 3, 2018
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

no comments

जीवन और परिस्थितयां! (निजी अनुभव) जारी है…2

फिर एक दिन…Shayari On My Photo_1525319146

फिर एक दिन सूर्य ऊगा और ऊगते ही जो डूब गया।
चमक प्रकाश चमकीला वो उसको एक ग्रहण लग गया।।

राह दिशा दिव्यता से थी जो पूर्ण, उसी पर अंधकार मिल जो गया।
टूटा विशवास टूटी आत्मा टूट हर क्षण प्रकृति का भावुक जो गया।।

भय भयंकर भयानकता से पूर्ण, भयानक हर क्षण भयभीत मुझ को जो कर गए।
बदला जीवन बदले घाव, हर आँसू आँखों के उस क्षण जब एहसास जीवन के बदल गए।।

पथ पवित्रता राही की अपने, मलिन मर्यादा दर्शन जीवन का एक भृम जैसे भृम सब मिट गए।
रचावचक्रव्यूह था रचा द्रोण(गुरु) ने जब, अर्जुन(विक्रांत राजलीवाल) फिर चुप कैसे रहे।।

घात था क्षण सयम जीवन पर, आत्मा परमात्मा साक्ष्य, भविष्य प्रकृति के जब बदल गए।
वैकुंठ(ह्रदय के भीतर कहि) विचार रहे प्रतीक्षा, अवसर समान, हर स्वास जीवन के जब बदल गए।।

(शेष अगले क्रम में)

स्वतन्त्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखत एव जीवन अनुभव।

3/05/2018 at 09:22 Am

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: