आज ये दिल फिर से अपनी हर टूट चुकी धड़कनो से कुछ उदास है न जाने क्यों…पर उदास है।

हमदर्द समझा दर्द ओ दम जिंदगी का जिनको हमेशा ही अपनी हमने।

दुआएं टूटे दिल की टूटी धड़कनों से जिनको हमेशा ही दी अपनी हमने।।

किया वॉर सरेराह धड़कनो पर, ज़हर जिंदगी का नफ़रत से ज़िन्दगी को देकर उन्होंने जो जख्म।

तोड़ कर एतबार एतबार से जिंदगी का, बना दिया नासूर जिंदगी का उन्होंने हर जो ज़ख्म।।

 

जिनको हमने हमेशा ही अपना हमदर्द समझ ने कि भूल की,
जिन संगदिलों को अपने टूटे दिल की टूटी धड़कनो से हमेशा ही हमने दुआएं दी!

उन्होंने हमेशा ही हमे दिए तो सिर्फ अपनी नफरतों के बेदर्द से दहकते ज़हरीले ज़ख्म।

हर ज़ख्म पर लिख दिया फिर भी कसूर अपना हमने, दे कर हर ज़ख्म को जिंदगी एक नया ज़ख्म।।

 

जो भी हो आज ये दिल फिर से अपनी हर टूट चुकी धड़कनो से कुछ उदास है न जाने क्यों…पर उदास है।

स्वतँत्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

10/05/2018 at 20:23 pm20180510_202759

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