Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

May 13, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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रूठा अक्स!

इंतज़ार! हा रहता है मुझ को हर लम्हा जिंदगी में अब भी एक साए का इंतज़ार।
रूठ गया है जो न जाने क्यों मुझ से, करता नही मुझ से जो अब कोई बात।।

कोशिश करता हु मान जाए वो, है जो रूठा साया, एक बिछुड़ा अक्स, रूठी शख्शियत का जो मेरा।
नराज है शायद मुझ से वो कि क्यों कर दिया कत्ल नादानी से, होशहोहवास में अपने, मैने जो उसका।

उम्मीद है जिस दिन लहू की आखरी बूंद से लिख दूंगा हक़ीक़त अस्तित्व कि है जो असल मेरा।
हो जाएगी शायद एक बार फिर से मुलाकात उससे, रूठ गया जो साया, अक्स शख्शियत का, है जो मेरा।।

ख़ामोश अहसासों की वीरानियों से आहत जिस दिन भी सुनाई कोई देगी, अहसास रूहानी छू कर एक पुकार रूह से ज़मीर को मेरे जब झंझोर देगी।

गर्द से कब्र के आ जाएगा बाहर अपनी, धड़कने उसकी जिंदा फिर होगी, कर देगा कत्ल मासूमियत से मेरा, तब उससे(खुद की शख्शियत से) मुकम्मल एक मुलाकात होगी।

रचनाकार एव कवि-नज़्मकर विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित उनका एक अधूरा अहसास।

 

13/05/2018 15:11pm20180513_150941.jpg

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