Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

May 18, 2018
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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अहसास! (Repost)

उठते है तूफान ए जज़्बात अक्सर टूटे इस दिल से टूटी हर धड़कनों के साथ।
होता है अहसास ए हक़ीकत से जब भी, रुक जाती है सांसे मेरी, मेरी बेताबियाँ के साथ।।

ख़्वाहिश है वस्ल ए रूह, ख़ामोश है अहसास जो रूहानी न जाने क्यों किसी ख़ामोशी के साथ।

गुनाह है लहू ए दस्तखत, फ़रमान ए मौत सा कोई, जिंदा है
धड़कने जो सितम किसी बंदिशों के साथ।।

स्वतँत्र लेखक विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

7/05/2018 at 17:28pm

 

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