बिना किसी व्यक्ति की हकीकत को जाने उस पर उस के व्यक्त्वि पर व्यंग्य कस देना बेहद सरल हो सकता है।

बीच बाजार किसी की खिली उड़ा देना, उस पर कोई इल्जाम दे कर उसे बदनाम करना बेहद सरल हो सकता है।

मग़र किसी रोते हुए को अपनी सहानुभूति प्रदान करते हुए, उसके मासूम आँसुओ को पोछ पाना सरल नही।

किसी मजबूर एव बेबस की निस्वार्थ भाव से सहायता करते हुए उसके सकूँ के कुछ क्षण प्रदान करना सरल नही।

बुराई, अधर्म, अनैतिकता के मार्ग को अपनाना सरल हो सकता है परन्तु उस मार्ग का अंत विनाश पर ही समाप्त होता है।

अच्छाई, धर्म, नैतिकता के मार्ग को अपनाना थोड़ा कठिन अवश्य हो सकता है परंतु इस दिव्य मार्ग पर अनन्त काल तक दिव्य प्रकाश सुख, शांति एव समृद्धि हमेशा आपके साथ साथ ही चलती है।

स्वतन्त्र लेखक, कवि-शायर नज़्मकार एव विचारक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित उनके विचार जो उनके जीवन अनुभव से प्रेरित है।

21/05/2018 at20:08  pm

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