नमस्कार प्रियजनों, आप सभी एक महान व्यक्तित्व के स्वामी है। यह बात मैं केवल अपने चाहने वालो के संदर्भ में ही नही कह रहा हु। यह वचन उन सभी व्यक्तियों को अंकित करता है। जो आज भी प्राचीन कालीन विद्या या कला जैसे कि शास्त्रीय संगीत, काव्य-कविता, नज़्म-ग़ज़ल सुनना पसंद करते है। ऐसा क्यों? इसके पीछे भी एक महत्वपूर्ण कारण है मित्रों!

परन्तु इसको विस्तार पूर्वक समझने या समझाने से पूर्व एक अति महत्वपूर्ण विषय आप सभी से सांझा करना चाहूंगा कि जब भी आपको कोई नोजवान लेखक या लेखिका की कोई रचना इन शैली में पढ़ने को प्राप्त हो जाए तो आप उसकी प्रसंशा जरूर करे बिना उसमें कोई त्रुटि निकालने के! चाहे उसमें कोई भी लय सम्बन्धित या भाव सम्बन्धित त्रुटि हो! ऐसा क्यों?

इसका भी एक महत्वपूर्ण कारण है मित्रो आज के समय मे जब हर तरफ अश्लील साहित्य की भरमार है। जो अधिकतर पचिमी सभ्यता की ही देन है। ऐसे में हर कोई नवन्तुक अधिक प्रसिद्धि प्राप्त करने के लिए अश्लील फिल्मी गाने या जिसे पचिमी गाने जिसे रेप कहते है जिसमे अधिकते अश्लील भाषा का समंवय ही होता है कि ओर आकर्षित हो ऐसा ही लिखना या सुनाना चाहेगा। जिससे वह रातो रांत प्रसिद्धि प्राप्त कर अधिक से अधिक धन अर्जित कर सकें।

👉 यहाँ मैं आपका ध्यान अब इस ओर केंद्रित करना चाहूंगा कि ऐसे माहौल में जब कोई नवन्तुक लेखक या लिखिका आपको एक सभ्य मनोरंजक सहित्य चाहे वह शास्त्रीय संगीत हो, काव्य-कविता हो, नज़्म-ग़ज़ल हो या ऐसी ही कोई भी रचना जो आप का आपके सम्पूर्ण परिवार के साथ मनोरंजन करने में समर्थ हो, तो आपको उसको एक बार जरूर प्रोत्साहित करना चाहिए क्योंकि आज के इस अश्लील माहौल में यह विद्या या कला अब विलुप्ति के कगार पर है।

ऐसे में आप उन तमाम नवन्तुक लेखक या लेखिकाओं को जो इस सत्य साहित्य के मार्ग की ओर अग्रसर है एक बार जरूर आप उनको परुत्साहित कर इस प्राचीन विद्या को विलुप्ति से बचा सकते है।

क्योंकि सच्चा साहित्य आपको एक सच्ची शक्ति एव परिवारिक माहौल प्रदान करता है।

अब मैं आपका अधिक समय न लेते हुए केवल इतना ही कहना चाहूंगा कि यह मांग है एक सभ्यता को उनकी प्राचीन कला को संरक्षित करने के लिए। उनको आज के फिल्मी या पचिमी अश्लील साहित्य से बचा कर एक जीवन प्राण ऊर्जा देने के लिए।

अगर मेरे किसी भी वाक्य से कुसी को भी तनिक भर भी ठेस पहुची हो तो मै रचनाकार विक्रांत राजलीवाल अपने ह्रदय से क्षमा प्राथी हु।

उम्मीद करता हु मेरे इस लेख को लिखने की वास्तविक वजह तक आप जरूर पहुच एव समझ पाएंगे।

धन्यवाद।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक गुहार।

2 thoughts on “सत्य साहित्य।

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