Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Jul 1, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

no comments

दिल से।

चंद लाइन अर्ज करना चाहूंगा कि…

देख कर साए दुख और तकलीफों के ए ज़िन्दगी के मुसाफ़िर राह ए ज़िन्दगी में अपने कही।

बदल न देना राह मंज़िलो की हो कर के मजबूर ज़िन्दगी से छोड़ न देना साथ ज़िन्दगी का जिंदगी से अपने कहि।।

छूटता है तो छूट जाए चाहे करवा महफ़िलो का ए ज़िन्दगी के मुसाफ़िर पीछे तेरे कहि।

फ़क्त छूटने न पाए चाह ज़िन्दगी कि जिंदगी से ज़िन्दगी को जीने कि कही।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

08/07/2018 at 10:15 am

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: