Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Jul 14, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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🌹सफ़र ए ज़िंदगानी। (जो अभी तक केवल मेरे युट्युब चैनल Author Vikrant पर ही प्रकाशित lonch हुई है)

🌹सफर ए जिंदगानी।(ग़ज़ल)

टूटते हर ख्वाबों से, जिंदा है जो ख्वाब कई , रखा है उनको सलामत हमने कहि ।
हर सितम से टूटे दिल कि, टूटी है धड़कन कई, रखा है उनको सलामत हमने कही।।

हर लम्हा जिनकी हिफाज़त हमने करि, कुछ बेरुखिया रुकी सी सासे जो सलामत हममे कही।
हर रुके लम्हो से तड़पती, चाहते है दर्द कई , रुकी हर धड़कनो में सलामत हममे कहि।।

आए सैलाब जो जिंदगी में कभी, गए टूट जज्बातों से टकराकर हममे कहि।
बदला मौसम बदली फिजाएं, बदल गए हालात सब,
जिंदगी के जो न बदले, जख्म जज्बात हममे कहि।।

नही मालूम ये सफर, ये जिंदगी के रास्ते, चलते चलते बदल गए जो मुकाम जिंदगी के रास्ते।
मंजिलो का पता पूछते पूछते, बदल गए सफर जो मुसाफ़िर बदल गए जो रास्ते ।।

स्वतन्त्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

View on Author Vikrant Rajliwal

(युट्युब चैनल है)

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