20180715_2012151. अहसास।

लहू ए ज़िगर चाहती है एक बग़ावत, हर एक जंजीर बाँधे जो गुलाम को गुलामी से।

हर एक अहसास दबाए है जो जुल्मों सितम, दास्तां ए मौत अहसासों कि अपने, ख़ामोश अपने अहसासों से।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

2. एक दर्द।

ज़ख्म मिला है दिल को धड़कनों को मेरे, दर्द ए दिल अहसास तुम्हे भी होगा।

चीखते अश्क, तड़पते जख्म, दर्द ए दिल, सुन वो बेताब धड़कने,
ख़ामोश लबो से सुना दी दास्तां ए महोबत जो मैने।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

3. एक तड़प।

हर गहराइयों से ए महोबत दिल कि अपने,
याद दीवाना तुम को हर एक पल करता है।

हर ग़ज़ल, हर गीत, दर्द ए दिल वो यादे तेरी,
दीदार ए सनम एक जमाने से तन्हा ये दिल तड़पता है।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
(All three topics repost)

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