Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Jul 21, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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एक अहसास।

CollageMaker_20180721_213800365.jpgआज होता है अहसास के हर अहसास ज़िन्दगी के अब मिटने लगे है।
शायद अहसास ज़िन्दगी के अब खुद ही खुद की धड़कनो से डरने लगे।।

सफर तन्हाइयों का खत्म ही नही होता है जो जिंदगी से बेदर्द।
हर तन्हाई अब खुद ही ज़िन्दगी को ख़त्म करने लगी है।।

एक सवाल खुद ही खुद से करता हु अब अक्सर, घड़ी धड़कनो कि रफ्तार से शांत जिस दिन हो जाएंगी।

मुक्ति उस रोज़ तड़पती धड़कनो को क्या उन शांत धड़कनों में मिल जाएगी! घड़ी धड़कनो कि रफ्तार से शांत जिस दिन हो जाएगी।।
या
तब भी शांत हर धड़कने रुकी हर धड़कनो को मेरी और भी तड़पाएगी! घड़ी धड़कनो कि रफ्तार से शांत जिस दिन हो जाएंगी।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

21/072018 at 21:40pm

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