FB_IMG_1521732407226एक चीख सुनाई देती है आज भी अनजाने मुसाफ़िर मुझे।

ये रुकी सांसे ये ठहरी ज़िन्दगी ये एहसास ए जुदाई,

मेरे खुद के नही।।

खो गए है जो एहसास न वो मेरे थे और कॉयम है जो

एहसास अभी टूटी धड़कनो में मेरे न ही ये मेरे है।

हम मिले के नही एक दूजे से एहसास बिछुड़ने से है यकीं,

न वो हमसे मील थे और न ही हम उनसे कभी जो मिले थे।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

28/07/2018 at 24:01am

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