शिक्षा! शिक्षा हमारे मानव जीवन की जो सबसे अहम आवश्यकता है। जिसकी प्राप्ति के लिए हम अपने बच्चों को उच्च से उच्च विद्यालयों या विश्वविद्यालयो में प्रवेश करवाना या दाखिला नाम दर्ज करवाना चाहते है। परन्तु ऐसा क्यों?

इस अति संविनशील एव महत्वपूर्ण प्रशन का उत्तर हम में से अधिकतर व्यक्ति या अभिभावक यही देना चाहेंगे कि क्यों कि इन विद्यालयों या विश्वविद्यालयो से शिक्षा प्राप्त कर उतरीं होने के उपरांत हमारे बच्चों को एक उचित रोजगार की प्राप्ति हो सके और उनका भविष्य सुरक्षित हो जाए!

परन्तु मै आपसे पूछना चाहता हु कि क्या शिक्षा का महत्व केवल रोजगार की प्राप्ति तक ही सुनिचित होना चाहिए। या सही मायने में शिक्षा का कुछ और भी इन सबसे कुछ अधिक महत्व हो सकता है?

जी हां परन्तु इसके लिए सर्वप्रथम हमे खुद शिक्षा के अर्थ को समझना होगा और अपनी आनेवाली नस्लो को भी शिक्षा का वास्तविक अर्थ समझ पाने योग्य योग्यता प्राप्त करने में अपना पूर्ण सहयोग एव सानिध्य प्रदान करना होगा।

मित्रो जहा तक मैने शिक्षा को समझा एव महसूस किया है उसके मुताबिक शिक्षा का महत्व केवल रोजगार प्राप्ति का एक साधन मात्र नही है। अपितु जो हमारी अंतरात्मा को जाग्रत करते हुए हमें पूर्ण चेतना का अनुभव प्राप्त करवा सके वही वास्तविक शिक्षा है। जिसके द्वारा हमारे चेतन एव अचेतन मस्तिक्ष में सही और गलत व्यवहार एव विचार का अंतर कर पाने की क्षमता हमे सहज ही प्राप्त हो सके वही वास्तविक शिक्षा है।

अगर हम अपने मानव जीवन मे खुद को एव अपनी आने वाली नस्लो को सही मायने में शिक्षित कर पाए तो वह दिन दूर नही जब हर मनुष्य खुद पर खुद के व्यक्तिव पर एक गौरवमयी गर्व महसूस करते हुए न केवल अपने आसपास अपितु सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अपनी इस दिव्य ऊर्जा से संचालित करते हुए उसका सम्पूर्ण विकास कर सकने योग्य योग्यता को प्राप्त हो जाएगा।

आज हमारे सभ्य समाज को सही ज्ञान एव शिक्षा की अति आवश्यकता है। आज हमारे समाज में एक राजनीतिक एव समाजिक उथलपुथल एव असुरक्षा का भाव उतपन होता जा रहा है। ऐसे में भी अगर हम केवल रोजगार की प्राप्ति मात्र के लिए ही शिक्षा का महत्व समझ पाने की भूल करेंगे तो यह समस्या दिन प्रतिदिन और भी जटिल हो जाएगी। रोजगार का महत्व मैं भी समझता हूं और उसे नकार या अनदेखा नही कर सकता परन्तु शिक्षा ऐसी हो जिसमें सर्वप्रथम हमारी अंतरात्मा में अपने लिए, अपनो के लिए या यह कहना अधिक उचित होगा की सम्पूर्ण मानवता के लिए एक प्रेम का, एक भाईचारे का पवित्र भाव सहज ही उत्तपन हो सके। अगर ऐसा हो पाया तो वह दिन दूर नही जब यह सम्पूर्ण संसार स्वर्ग के समान सुंदर एव दिव्य हो मानवता के भाव से महक उठेगा।

परन्तु मैं आपसे पूछता हूं इस भ्र्ष्टाचार एव व्यभिचार के युग मे वह दिन कब आएगा…कब आएगा वह दिन?

स्वतन्त्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।15/04/2018 at 13:30 Pm

(Repost)FB_IMG_1534055807768.jpg

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