Author, Writer, Poet, Drama and Story Writer Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

August 17, 2018
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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🌹 सफर ए ज़िन्दगानी। (ग़ज़ल)

टूटते हर ख्वाबों से, जिंदा है जो ख्वाब कई , रखा है उनको सलामत हमने कहि ।

हर सितम से टूटे दिल कि, टूटी है धड़कन कई, रखा है उनको सलामत हमने कही।।

हर लम्हा जिनकी हिफाज़त हमने करि, कुछ बेरुखिया रुकी सी सासे जो सलामत हममे कही।

हर रुके लम्हो से तड़पती, चाहते है दर्द कई , रुकी हर धड़कनो में सलामत हममे कहि।।

आए सैलाब जो जिंदगी में कभी, गए टूट जज्बातों से टकराकर हममे कहि।

बदला मौसम बदली फिजाएं, बदल गए हालात सब,
जिंदगी के जो न बदले, जख्म जज्बात हममे कहि।।

नही मालूम ये सफर, ये जिंदगी के रास्ते, चलते चलते बदल गए जो मुकाम जिंदगी के रास्ते।

मंजिलो का पता पूछते पूछते, बदल गए सफर जो मुसाफ़िर बदल गए जो रास्ते ।।

स्वतन्त्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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