Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

August 22, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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सत्य संकल्प।

सत्य संघर्ष जीवन से अपने, समाप्त कभी भी होने ना पाए।

विजय पराजय साथ साथ, राह रही कि कभी भी रुकने न पाए।।

साक्षी संघर्ष कि नेक भावनाएं, ज्ञान ह्रदय से मिटने न पाए।

पथ प्रकाश सत्य ह्रदय ध्वनियों से, ज्ञान दिप बुझने न पाए।।

जाग्रित जीवन से जाग्रित एहसास, भाव एहसासों से, कर्म भलाई के बढ़ते ही जाए।

नैकि कर नैकि के साथ, पाठ नैकि का दिव्य उजाला, दुर्जन भी साधु बन जाए।।

सत्य कर्म जो प्रबल भावना, भाव ह्रदय सत्य मार्ग से डिगने न पाए।

कर संकल्प विशवास साथ में, सत्य स्वास से अज्ञानवश भी मिटने न पाए।।
रचनाकार एव कवि विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
22/08/2018 at 15: 17 pmFB_IMG_1534055526004pm

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