Author, Writer, Poet, Drama and Story Writer Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

August 24, 2018
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

1 comment

एक एहसास-एक सत्य।

नमस्कार है आप सभी काव्य-शायरी एव हिंदी साहित्य के प्रेमी पाठको के लिए।

मित्रों आज सुबह उठा तो अपने जीवन संघर्ष से सम्बंधित कुछ एहसास हुए जो कि आज भी वैसे ही ताजा है। वह एहसास वह संघर्ष जो आज से लगभग 18 वर्ष पूर्व वर्ष 2000 से ही प्रारम्भ हो गए थे और आज तक निरन्तर जारी है कि कैसे एक कच्ची उम्र में (15 से 16 वर्ष) ड्रग्स के साथ युद्ध लड़ने का फैसला किया। और बिना किसी गुरु के ज्ञान के हर पल टूटते हुए एक अनजाने डर से लड़ते हुए टूटता गया। और लगभग 2.5 वर्षो तक कभी गिरा तो कभी सम्भला और अंत मे सही स्थान पर एक सही गुरु के समक्ष इस बीमारी का पता चला।

और स्वम् को इस बीमारी से लड़ते हुए अपने गुरुजनो के आदर्शो को समझते हुए उन्हें ह्रदय से अपनाते हुए अपने माता पिता के असीम प्रेम स्वरूप, ड्रग्स को पराजित करते हुए जीवन को उचित प्रकार से जीने का प्रयत्न करना हो या ड्रग्स के नशे को परास्त करने के उपरांत जीवन मे कुछ सकारात्मक कर्म करने के लिए खुद को शिक्षित करने के लिए एक अवसर की तलाश हेतु संघर्ष, स्वम् को अपने गुरुजनो को एव परिजनों को एक विशवास करवा पाना की अब में शिक्षा प्राप्त करने के लिए अपने ह्रदय से अपनी आत्मा से ततपर हु! और अवसर प्राप्ति के उपरांत अपनी असफलता के डर को अपनी प्रार्थनाओ से अपने सत्कर्मो द्वारा हराते हुए बिना रुके 10 से स्नातक की डिग्री प्राप्त करना हो और कभी अनपढ़ कि श्रेणी का वह बालक जब ईष्वर की असीम कृपा से इस लायक बनता है कि देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण सिविल सर्विसेज का एग्जाम फेस करना हो या उसके बाद का अपने जीवन की एक नई उमंग के साथ एक सत्य के साथ हिंदी साहित्य के सफर की शुरुआत जो जग जाहिर ही है।

अगर ईशवर कि असीम कृपा ऐसे ही मेरे सत्कर्मो के द्वारा मेरे ह्रदय अंतरात्मा को राह दिखाती रही तो सर्व प्रथम मेरी प्राथमिकता भविष्य में यही होगी कि अत्यंत विस्तृत स्तर पर एन्टी ड्रग कार्यक्रम के जरिए एक सकारात्मक रुख के साथ देश और दुनिया के विभिन शहरों और कस्बों में केम्पों और काउंसलिंग के साथ बच्चो बूढ़ो और जवानों को ड्रग्स समेत हर प्रकार के हानिकारक नशे के जाल से इस जानलेवा विष से मुक्त कर के उनके एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए किसी प्रकार से प्रेरित कर सकू। और अपने इस जीवन का इस धरती पर जन्म लेने का अपना नेक मकसद को पूर्ण कर सको।

मेरे द्वारा अगर एक भी घर का दिया ड्रग्स के विष से बुझने से बच पाया तो में रचनाकार विक्रांत राजलीवाल स्वम् को भग्यशाली ही समझूँगा… इस सब एहसासों को याद करते हुए कुछ पन्तिया आप सबको, अपने गुरुजनो को एव परिजनों को अर्पित करता हु कि…

🕊सत्य राह।

होता है खास दिवस प्रत्येक, आओ मिल कर साथ साथ भरे पुष्पों में रंग ए साथी, रह गए बेरंग से जो कोई।

हर स्वास है जीवित जीवन उमंग क्षण प्रत्येक, भाव मित्रता से राग सुहाना, स्थापित हर रग ह्रदय में जो कोई।।

बढ़ा कदम काटो से कंटीली होकर, मिट जाए हर छल कपट जो घाव घिनोने।

नही मिटेगा सत्य स्वास से सत्य उजाला, छूट जाए चाहे साथ साथी का प्रत्येक।।

रचनाकार एव कवि विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
24/08/2018 at 11:301535089502788am

One thought on “एक एहसास-एक सत्य।

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