Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Aug 26, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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रक्षाबंधन।

आज रक्षाबंधन का पवित्र तैवहार है। आज के इस पावन दिन के उपलक्ष्य में एक वर्ष पूर्व एक रचना लिखी रही आज पुनः आप अब सभी प्रियजनों को अपनी इस काव्य रचना के जरिए इस पवित्र पावन तैवहार की पवित्र भावना से जोड़ना चाहूंगा। अगर ऐसा किंचित मात्र भी हो सका हो मै रचनाकार विक्रांत राजलीवाल स्वम् को भग्यशाली समझूँगा।

तो आप सब के समुख प्रस्तुत है एक काव्य रचना…

रक्षाबंधन।

भाव-व्यवहार में है जो सबसे प्यारा, रक्षाबंधन का त्यौहार निराला।

एक धागा, एक दुआ है जो, रिश्ता ये प्यार का ह्र्दय भाव से सबसे प्यारा।।

हर नारी, हर एक कन्या, उनके हर एक आँचल से, बरसता अमृत है जो।

वो ममता, वो स्नेह, मिलता है हर भाई को, एक आशीर्वाद अनमोल है जो।।

खिल खिलौने, मिठाईओ से भी मीठा, एक वरदान जीवन का जीवन जीवन से जीवन को जो।

मां सी ममता, मित्र सी मित्रता, ज्ञान गुरु सा वो, बहन हर भाई को प्यारी जो।।

रहे खुशहाल, आबाद हमेशा, महकती फुलवारी जीवन की उसकी, प्यारी है हर भाई-मुझ-को जो।

दुख तकलीफ़, हर काटा जीवन से गम ज़िन्दगी का उसके, यही दुआ है मिल जाए हर भाई-अब मुझको वो।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
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26/08/2018  at 19:37 pm1535292149503.jpg

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