Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

Poetry, Kavya, Shayari, Sings, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

August 29, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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सत्य है।

स्वार्थी व्यक्तिव, बदले की भावना और सभ्य होने का दिखावा करते हुए मानवता कि हर परिभाषा को लहूलुहान करते हुए। जो मलिन व्यक्तिव के व्यक्ति आज स्वम् को ईश्वर से कम नही समझ रहे है।

सत्य है जल्द ही इस संसार में मौजूद पुण्यात्माओं के समक्ष उन सभी मलिन व्यक्तित्व के व्यक्तिओ को उनकी अंतिम स्वास तक उनके हर कुकृत्यों को सत्य के दिव्य प्रकाश द्वारा स्वीकार करवाया जाएगा और सत्य ही सत्य से सत्य का न्याय स्वम् करेगा।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

29/08/2018 at 09:37 am

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