Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Sep 1, 2018
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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एक संकल्प एक आवश्यकता।

आज हममें से अधिकतर व्यक्ति या विद्यार्थी जिन स्वार्थी व्यवस्थाओं एव प्रथाओं के शोषण से मुक्ति एव उनमें एक सकारात्मक परिवर्तन कि वार्ता करते है। ऐसा क्यों है कि एक समय के उपरांत हममें से अधिकतर व्यक्ति स्वम् भी उसी व्यवस्ता के साथ चलने के लिए विवश हो जाते है?

जिन स्वार्थी व्यवस्थाओ एव प्रथाओं के विरुद्ध अपना स्वर बुलन्द करते हुए हमनें इनका पुरजोर विरुद्ध किया था आज एक समय के उपरांत वही स्वार्थी व्यवस्थाएं एव प्रथाएं हमपर हावी होते हुए हमारे व्यक्तिव में एक भय का निर्माण करने पर उतारू है?

इसका कोई भी एक ठोस उतर दे पाना अत्यंत कठिन हो सकता है परंतु नामुमकिन नही। मेरे स्वम् के अनुभवों के मुताबिक स्वार्थी व्यवस्थाएं जो कि किसी के निजी स्वार्थ की ही देन होती है क्योंकि दोष उन व्यवस्थाओ का नही होता जो समाज के प्रतिषिठत व्यक्तिओ के द्वारा जनहित में जारी करि जाती है अपितु दोष होता है उन स्वार्थी व्यक्तिओ का जो अपने निजी स्वार्थ की सिद्धि हेतु उन का अनैतिक प्रयोग करते है। अगर हमारे सभ्य समाज के हर एक शोषित व्यक्ति एक साथ मिल जाए और एक सत्य संकल्प के साथ एक ऐसे संगठन का निर्माण करें जो एक साथ मिल कर उन स्वार्थी व्यवस्थाओं के परिवर्तन हेतु एक साथ एक स्वर से विजय का एक ऐसा जयघोष एक ऐसा जयकार लगाए कि हर स्वार्थी और भृष्टाचरी कि अंतरात्मा सत्य के समक्ष अपने कुकर्मो के परिणाम से उतपन एक भय से काँप उठे।

जिस दिन भी ऐसा सम्भव हो पाया तो विशवास करे इस सभ्य समाज मे कोई भी सभ्य व्यक्ति स्वम् को शोषित महसूस करते हुए स्वम् को ठगा हुआ महसूस नही कर सकेगा। मैं आप सभी महानुभवों से पूछना चाहता हु कि आखिर वह दिवस को आएगा…कब आएगा वह दिन?

जय हिंद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
01/09/2018 at 14:09 pm

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