Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Sep 3, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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🕊सत्य!

संसार को नैतिकता का ज्ञान बाटना, उच्चविचारो एव आदर्शो की बात करना, उनको उनके दोषों से अवगत करवाना सरल प्रतीत हो सकता है! परन्तु स्वम् उसी मार्ग का अनुसरण करते हुए सत्य के साथ कायम रहना, उन उच्चविचारो एव आदर्शो को अपने दैनिक जीवन की दैनिक दिनचर्या में पूर्णरूप से ढाल पाना, स्वम् को स्वम् के व्यक्त्वि को उसी प्रकार से स्वीकार कर पाना जैसा हम दूसरे व्यक्ति से उनके व्यक्तिव से आशा रखते है कदापि इतना सरल नही होता।

इस अति संविदनशील विषय को आप अभी महानुभवों से अपनी चन्द काव्य पन्तियो द्वारा सांझा करना चाहूंगा की…

🕯उठाई है संसार पर जो ऊँगली ए मनुष्य तूने जो उनके अज्ञात(निर्दोष) व्यक्त्वि पर।
🕯🕯क्या कभी खुद के व्यक्तिव को भी विचारा है समीप सत्य को धारण कर।।

🕯गूंज रही है हर दिशा से ध्वनि जो, सत्य है पुकार सत्य की जो।
🕯🕯बेबस, निर्दोषों की हत्याओं पर, कलंक आत्मा पर लिप दिया जो।।

🕯दफ़न ईमान भाव अहंकार से सरेराह जो, सत्य है असत्य नही स्वीकार जो।
🕯🕯शांत हर स्वर, शांत है वातावरण, शांति से मिट गया सत्य अस्तित्व का सत्य जो।।

स्वतँत्र लेखक एव कवि विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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