Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Sep 7, 2018
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

no comments

सत्य है।

इस देश की यह कैसे विडंबना है कि अगर व्यक्ति या एक विद्यार्थी अपने जीवन संघर्ष कि परिस्थितियों का सामना करते हुए किसी प्रकार ग्रेजोएट हो भी जाए तो भी सरकार से जुड़ने के लिए या सरकारी नोकरी कि योग्यता परीक्षा का पर्चा भरने के लिए और इस परीक्षा में बैठने के लिए उसे शुल्क देना पड़ता है। क्या सरकारी नोकरी कि परीक्षा में बैठने के लिए केवल विद्या की योग्यता पर्याप्त नही या फिर यहाँ भी संम्पन विद्यार्थि ही परीक्षा में बैठ सकते है और क्वालीफाई होने के उपरांत उनको ही अधिकार है अपने जीवन को सुरक्षित करने का!

अभावग्रस्त वियार्थी या जीवन संघर्षमय विद्यार्थी विद्या प्राप्त कर के भी सरकारी परीक्षाओ में बैठने के लिए या उस परीक्षा के फार्म शुक्ल को भरने के लिए वह आज भी संम्पन व्यक्तिओ की ओर क्यों विवशता से हाथ अपना फैलाने को क्यों विवश है?

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

07/09/2018 at 08:07 am20180905_211939

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: