सुधार के मार्ग पर हम प्रत्येक क्षण अपने कमजोर या विचलित होते एहसासों का एव भृमित मानसिकता से उतपन भृमित विचारो का सामना करते हुए जीत के एक कदम ओर समीप पहुच जाते है या फिर हम अपना मार्ग बदलते हुए अपने नशे के एडिक्शन को पुनः थाम सकते है।

यहाँ से हमे ज्ञात होते है दो मार्ग और दोनों का आरंभ एक साथ ही होता है परंतु दोनों की दिशा कदापी एक समान नही होती है।

सुधार के मार्ग पर इस दोराहा से हर एक सुधार के मार्ग के राही का सामना होना सुनिचित होता है। और इस दोराहे का आरंभ होता है आकर्षण से।

जी हा आकर्षण से! सर्वप्रथम हम आकर्षित होते है अपने नशे के उस एडिक्शन के प्रति जिसका हम कभी सेवन करते हुए भृमित रहते थे एव उस आकर्षण के कारण यहाँ से कुछ राही जिन पर प्रोग्राम की कृपा बरसती है वह अपनाते है प्रोग्राम को एव वह प्रोग्राम की शक्ति से अपने आकर्षण का सामना करते हुए विजय के एक कदम ओर समीप पहुच जाते है।

एव दूसरे वह राही होते है जिन पर प्रोग्राम की कृपा नही बरसती और वह अपनी कमजोर मानसिकता एव भृमित एकाकी सोच के कारण पुनः अपना नशे का एडिक्शन अज्ञान वश अपना लेते है।

यहाँ हमने दो मार्ग एव दो प्रकार के राही के विषय मे जाना जिनका उद्गम स्थान एक ही दिशा से निकलता है और वह दिशा है आकर्षण। परन्तु दोनों मार्ग के परिणाम भी दो प्रकार के होते है जैसे…

प्रथम वह राही जिन पर प्रोग्राम कि कृपा बरसती है एक जो प्रोग्राम की शक्ति से सामना करते है अपने नशे के एडिक्शन से उतपन भृमित आकर्षण का, जिसके फल स्वरूप उनके समुख होते है पुनः दो मार्ग।
1) प्रथम होता है जीत का मार्ग जो उनको उचित प्रोग्राम के ज्ञान एव उचित सानिध्य से सहज ही प्राप्त हो जाती है एव उनको सुधार के मार्ग पर एक कदम ओर आगे की ओर बढ़ाता है

2) एव दूसरा होता है उचित सानिध्य के अभाव के कारण हर विकट परिस्थितियों में प्रोग्राम की शक्ति पर विशवास करते हुए एक उचित सानिध्य एव एक असल विजेता के समुख अपनी कमजोर मानसिकता को स्वीकार करते हुए उनके मार्गदर्शन से स्वम् को अपने एडिक्शन के भृमित आकर्षण से बचाते हुए जीत के एक कदम ओर आगे को बढ़ जाना।

👉 इसके विपरित दूसरे प्रकार के वह राही होते है जो सुधार के मार्ग पर चलते हुए भी अपने नशे के एडिक्शन के आकर्षण की ओर न चाहते हुए भी एक उचित सानिध्य के अभाव से न चाहते हुए भी अपने एक गलत कदम के कारण पुनः अपने नशे के एडिक्शन की ग्रस्त में फस जाते है जिसके फलस्वरूप उन पर प्रोग्राम की शक्ति की कृपा नही बरसती और वह पुनः एक ऐसे जंजाल में फस जाते है यहाँ उनको मिलता है दर्द और सिर्फ दर्द! दर्द टूटते एहसासों से टूटते रिश्तों का, दर्द एक अनजाने डर का, दर्द जो उनको उनके उस एक गलत कदम के कारण प्राप्त होता है जिससे वह बच सकते थे केवल और केवल प्रोग्राम के सही ज्ञान एव प्रयोग से, वह बच सकते थे एक उचित सानिध्य से प्राप्त एक सही मार्गदर्शन के फलस्वरूप एक उचित कदम से।

👉 यहाँ से उनके समुख भी होते है दो मार्ग!

1) प्रथम जो उनको पुनः एक उचित सानिध्य कि प्राप्ति से प्रोग्राम की ओर अग्रसर करते हुए पुनः सुधार के मार्ग की ओर प्रशिक्षित करता है। एक उनका दर्द मिटाते हुए उन्हें एक कदम ओर जीत ओर बढ़ाते हुए एक आत्मशांति का अनुभव प्रदान करता है।

2) एव दूसरा होता है एक उचित सानिध्य के अभाव के फलस्वरूप अपने आप को अपने नशे के एडिक्शन कि ओर एक कदम ओर आगे को बढ़ाते हुए उनका एक अनन्त एव अनिचित काल तक दर्द से परिचय करवा देता है। जहाँ दुख, गरीबी, बीमारी एव मानसिक परेशानी न केवल उनका अपितु उनके अपनो का जीवन भी बर्बाद करते हुए नरक से भी बतर बना देती है।

इसीलिए सुधार के मार्ग पर उचित सानिध्य की प्राप्ति एव साथ अति आवश्यक होती है क्योंकि जीत का मार्ग उचित सानिध्यता से और भी परखस्त होता है और यह उचित सानिध्य हमे प्राप्त होता है प्रोग्राम की बैठकों एव अपने जैसे अन्य सुधार के राही के इर्द गिर्द। जो हमे उचित समय पर उचित मार्गदर्शन उवलब्ध करवाते हुए हमें अपने नशे के एडिक्शन के मनमोहक मगर खतरनाक जहरीले आकर्षण से सुरक्षित रख सकते है और हमे जीत के एक कदम ओर समीप पहुचा देते है।

धन्यवाद।

रचनाकार, लेखक, एव विचार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। (एक रिकवरी एडिक्ट)

12/09/2018 at 35 pm

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