एहसास (आत्मशांति)

नमस्कार मित्रों, यहाँ मैं आप सब के साथ अपने कुछ विचार एव भाव सांझा करना चाहूंगा कि मेरा एन्टी ड्रग का विचार एव भाव व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम का सफर मार्च 2004 मेरी स्मृति के हिसाब से एव 2003 मेरे गुरदेव के हिसाब से क्योंकि मुझ को आज भी अपने विचार एव भाव परिवर्तन कार्यक्रम के शुरुआती दिन एव उस की अधिकतर स्मृति का आज भी सम्पूर्ण ध्यान नही है।

यहाँ मैं आप सभी प्रियजनों को बताना चाहूंगा कि अपने इस 14 या 15 वर्ष के सफर के दौरान अभी तक मैं 3 से 4 बार रिलेप्स ( प्रथम जब मैं अनपढ़ था एव शिक्षा की प्राप्ति के लिए संघर्ष कर रहा था। द्वितीय शादी के उपरांत शिक्षा प्राप्ति के अवसर को प्राप्त होने से पूर्व एव तृतीय शिक्षा का अवसर प्राप्त होने के उपरांत 2008 से 2017 के दौरान केवल तीन पारिवारिक समारोह के दौरान ) को फेस करते हुए। आत्मशांति की प्राथना एव प्रोग्राम की मदद एव ज्ञान से स्वम् को सुरक्षित रहते हुए अपनी 10वी से स्नातक की शिक्षा एव साहित्यक सफर से गुजरते हुए यहाँ तक पहुचा हु।

आज मुझ को यह स्वीकार करते हुए अति सम्मान एव आत्मशांति का अनुभव एव एहसास होता है कि आज मुझ को अपनी रिकवरी के सफर से गुजरते हुए पूरे एक वर्ष दस दिन ( 6 अगस्त 2017 से अब तक 1 वर्ष और 10

दिन) हर प्रकार के नशे से दूर रहते हुए अपने गुरुजनो के सानिध्य एव आशीर्वाद से प्राप्त हुए है।

एव मैं अब भी समय मिलते ही अपने इन 15 वर्षो के अनुभवों एव उपलब्धियों को ड्रग एव नशे के आदि अन्य व्यक्तिओ के उपचार हेतु उनसे सांझा करते हुए उनको एक सशख़्त मार्गदर्शन उपलब्ध करवाते हुए स्वम् को एव अपनी रिकवरी को एक कदम और ईश्वर की दिव्य विजय कि ओर अग्रसर कर पाता हूं

मेरा यह 14 से 15 वर्षो का सफर इतना सरल नही था जितना कि अब प्रतीत होता है। मै रचनाकार, लेखक, कवि, शायर, नाटककार, ग़ज़लकार, संगीतकार, एव विचारक की आज जिन अनेक भूमिकाओं को निभाता हु इसके साथ ही मेरी प्रथम प्रकाशित समाजिक एव मानवता की भावनाओ से प्रेरित कविताओं की पुस्तक *एहसास* जो वर्ष 2016 जनवरी में प्रकाशित हुई। यह सब ईष्वर की कृपा एव प्रोग्राम की सहायता के बिना शायद ही मुझ को प्राप्त हो पाते।

आज मैं अपनी समस्त उपलब्धियों को अपने ईष्वर को, अपने प्रोग्राम को समर्पित करते हुए अन्य नशे एव मानसिक रूप से बीमार व्यक्तिओ, अपने गुरुजनों एव स्वम् के लिए आत्म शांति की प्राथना करता हु।

हे ईष्वर

हमे ऐसी आत्मशांति दो

जिससे हम उन चीजों को

स्वीकार कर सके

जिन्हें हम बदल नही सकते।

हिम्मत दो

उन चीजों को बदलने की

जिनको हम बदल सकते है।

और हमे ऐसी सद्बुद्धि दो

जिनसे हम इन दोनों का

भेद जान सके।

धन्यवाद।

रचनाकार एव लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। ( रिकवरी एडिक्ट 2003 से एव 6 अगस्त 2017 से रिकवरी में )

16/09/2018 at 21:14 pm

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