Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Sep 17, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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💥 आपसी प्रेम एव भाईचारे।

आज हम सब के इस भारतवर्ष के प्रधानमंत्री के पावन जन्मदिवस के दिन मेने सोशल मीडिया के समस्त महान मंचो पर देखा और महसूस भी किया कि आज देश के लगभग समस्त विपक्षी राजनीतिक दलों ने आदरणीय प्रधानमंत्री जी को उनके पावन जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं भेंट करि।

यह देख कर ह्रदय को अत्यंत शांति का अनुभव प्राप्त होता है कि जब भी कभी ऐसे ही किसी महत्वपूर्ण एव पावन दिन देश के सत्ताधारी एव लगभग विपक्ष की समस्त राजनीतिक पार्टी एक दूसरे से एक साथ मेलमिलाप करते हुए सामाजिकता की भावना को महत्व देते हुए दिखाई देते है।

जिससे देश के गरीब एव कमजोर वर्ग को अकारण उतपन्न हुए राजनीतिक भय के वातावरण से कुछ सिमा तक मुक्ति प्राप्त हो पाती है। और उन्हें यह विश्वास हो पाता है कि उनका मतभेद केवल विचारधारा के पृथिकर्ण का है न कि कोई निजी बेर की भावना का मतभेद है जिस की ज्वंलत बेर की निर्दयी अग्नि से उनके घर परिवार स्वाहा हो सकते है।

ऐसे ही अगर समय समय पर समस्त राजनीतिक दल (सताधारी एव विपक्षी राजनीतिक दल) आपसी मतभेदों को दरकिनार करते हुए देश की जनता के समक्ष आपसी प्रेम एव भाईचारे का एक सकारात्मक संदेश उपलब्ध करवा सके तो इस देश और दुनिया मे शांति और सकूँ का एकछत्र राज स्थापित हो जाएगा।

यहाँ मैं एक साधारण सा व्यक्ति, एक छोटा सा क़लमकार विक्रांत राजलीवाल देश के समस्त राजनीतिक दलों से यह जानना चाहूंगा कि वह दिन कब आएगा जब देश के कमजोर एव गरीब वर्ग के ह्रदय से राजनीतिक विध्वंश का भय संपूर्ण रूप से समाप्त हो कर उन्हें भी अपने ही देश मे जीते जी एक आत्मशांति के मानवतापूर्ण भाव का अनुभव उपलब्ध हो सके…आखिर कब आएगा वह दिन?

जयहिंद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
17/09/2018 at 18:25 pm20180905_121737

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