Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Sep 20, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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ख़ामोशीया!

20180513_112029.jpgगर न हो जवाब किसी भी सवाल का, किसी भी जवाब में जो सवाल का हमारे।
खमोश जुबा से बेगाना, खामोशियो को धड़कते सीने से अपने फिर लगाएगा।।

हर खामोशियो से टकराकर जवाब हर सवाल का खामोशी से हमारे फिर आएगा।
जनून ए जिंदगी से हो कर के फ़ना, नज़्म तन्हाइयो में फिर ये कोई दुहराएगा।।

लहू से सरोबार है श्याही जो टूटी कलम में हिफ़ाजत से अब भी हमारी।
एक रोज तड़प से उसकी कलेजा आसमां का भी सिमट कर फट जाएगा।।

हर अहसास है जख्मी सा मेरा, जख्म हर लम्हा है जो ख़ामोश अहसास, अब नासूर हो गए।
नास

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